चिंता छोड़ो सुख से जियो | How to Stop Worrying and Start Living Book Summary in Hindi

चिंता छोड़ो सुख से जियो | How to Stop Worrying and Start Living Book Summary in Hindi

चिंता छोड़ो सुख से जियो | How to Stop Worrying and Start Living Book Summary in Hindi
चिंता छोड़ो सुख से जियो | How to Stop Worrying and Start Living Book Summary in Hindi
Hello Friends,आपका स्वागत है learningforlife.cc में। इस पोस्ट को पड़ने के बाद आपकी जो चिंताए है वो ख़त्म हो जाएगी | 

चिंता के बारे में मूलभूत तथ्य, जो आपको पता होने चाहिये :-

नियम 1: अगर आप चिंता से बचना चाहते हैं, तो वही करें जो सर विलियम ऑस्लर ने किया था: “वर्तमान में एक-एक दिन जिये” यानी “डे-टाइट कम्पार्टमेंट में जियें।” *भविष्य की चिंता में न घुलें। हर दिन सिर्फ सोने के समय तक जियें।”


नियम 2: अगली बार जब आपके सामने कोई समस्या – बड़ी समस्या – आये, तो विलिस एच. कैरियर के जादुई फार्मूले को आज़माकर देखें:

  1. खुद से पूछें, “अगर मैं अपनी समस्या नहीं सुलझा पाता, तो मेरे साथ बुरे से बुरा क्या हो सकता है?”
  2. आवश्यकता पड़ने पर बुरे से बुरे परिणामों के लिये अपने आपको मानसिक रूप से तैयार कर लें।
  3. फिर ठंडे दिमाग से अपने सोचे बुरे से बुरे परिणाम को सुधारने की कोशिश करें – उन्हें स्वीकार करने के लिये आप पहले ही खुद को मानसिक रूप से तैयारकर चुके हैं।
नियम 3: खुद को याद दिलायें कि आप स्वास्थ्य के संदर्भ में चिता की कितनी ज़्यादा क़ीमत चुका रहे हैं। “जो चिंता से लड़ना नहीं जानते, वे जवानी में ही मर जाते हैं।”

चिंता का विश्लेषण करने की मूलभूत तकनीके :-

नियम 1: तथ्य इकट्ठा कीजिये। याद रखें कोलंबिया युनिवर्सिटी के डीन हॉक्स ने यह कहा था-

“दुनिया की आधी चिंता तो इस कारण होती है कि आप निर्णय लेने की कोशिश करते है, परंतु आपके पास पर्याप्त जानकारी नहीं होती, जिसके आधार पर आप निर्णय ले सकें।”



नियम 2: सारे तथ्यों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करके किसी निर्णय पर पहुंचे।

नियम 3: जब एक बार सावधानी से कोई निर्णय ले लिया जाये,तो फिर कर्म करें। अपने निर्णय के अनुसार काम करना शुरू कर दें – और परिणाम की चिंता करना छोड़ दें।

नियम 4: जब आप या आपके सहयोगी किसी समस्या के बारे में चिंता करने के मूड में हों, तो नीचे लिखे सवालों और उनके जवाबों को लिख ले :

  1. समस्या क्या है?
  2. समस्या का कारण क्या है?
  3. इसे कितने तरीकों से हल किया जा सकता है?
  4. इसे हल करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

इससे पहले कि चिंता आपको ख़त्म दे,आप चिंता को ख़त्म कर दे :-

नियम 1: अपने दिमाग को व्यस्त रखकर चिंता को बाहर निकाल फेंके। काम में जुटना चिंता का बहुत बढ़िया इलाज है।

नियम 2: छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ न बनायें। छोटी-छोटी चीज़ों – यानी जीवन की दीमकों को अपनी ख़ुशी बर्बाद न करने दें।

नियम 3: अपनी चिंताओं को जीतने के लिये औसत के नियम का प्रयोग करें। खुद से पूछे, “इस बात के होने की कितनी संभावना है?”

नियम 4: अवश्यंभावी के साथ सहयोग करें। अगर आप जानते हैं: कि किसी परिस्थिति के बदलाव या सुधारना संभव नहीं है,तो खुद से कहें, “यह हो चुकी है। यह बदल नहीं सकती।”‘

नियम 5: अपनी चिंताओं पर स्टॉप लॉस” ऑर्डर लगा दें। यह फैसला करें कि किसी चीज़ पर कितनी चिंता करनी चाहिये – और फिर उससे ज्यादा चिंता करना बंद कर दें।

नियम 6: अतीत को दफ़न कर दें। आरी से बुराई न चीरें।

सुख-शांति का मानसिक नज़रिया विकसित करने के सात तरीके :-

पहला नियम: हम अपने मस्तिष्क को शांति, साहस, स्वास्थ्य और आशा के विचारों से भर दें, क्योंकि हमारे विचारों से ही हमारी जिंदगी बनती है।”

दूसरा नियम : हम अपने दुश्मनों से बदला लेने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे हम उनकी बजाय खुद को ज्यादा नुक़सान पहुँचाते हैं। हम जनरल आइज़नहॉवर के फ़ॉर्मूले को अपना लें: 

जिनको हम पसंद नहीं करते, उनके बारे में सोचने में अपना एक मिनट भी बर्बाद न करें।

तीसरा नियम :

  1. कृतघ्नता के बारे में चिंता करने के बजाय हम इसकी उम्मीद करें। हमें याद रखना चाहिये कि ईसा मसीह ने एक दिन में दस कोढ़ियो को ठीक किया था – और सिर्फ एक ने ही उन्हें धन्यवाद दिया। हम ईसा मसीह से ज्यादा कृतज्ञता पाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
  2. हमें याद रखना चाहिये कि सुख पाने का एकमात्र रास्ता यह नहीं है कि हम कृतज्ञता की अपेक्षा रखें, बल्कि यह है कि हम देने के आनंद के लिये दें।
  3. हमें याद रखना चाहिये कि कृतज्ञता “विकसित किया गया”गुण है, इसलिये अगर हम अपने बच्चों को कृतज्ञ बनाना चाहते हैं तो हमें उन्हें कृतज्ञ होने का प्रशिक्षण देना होगा।

चौथा नियम : अपनी नियामतें गिनो, अपने कष्ट नहीं!

पाँचवाँ नियम : हम दूसरों की नक़ल न करें, बल्कि अपने असली स्वरूप को पहचानें और उसी रूप में रहें, क्योंकि “ईर्ष्या अज्ञान है”‘ और “नकल करना आत्महत्या’ है।

छठवाँ नियम : जब किस्मत हमें नीबू थमा दे, तो हम नीबू का शर्बत बनाने की कोशिश करें।

सातवाँ नियम : दूसरों को थोड़ा सुख पहुंचाने की कोशिश में हम अपने दुख को भूल जायें।

जब आप दूसरों का भला करते हैं, तो आप अपना सबसे ज्यादा भला करते हैं।

चिंता को जीतने का आदर्श तरीका:-

चिंता दूर करने का सबसे अचूक उपाय धार्मिक आस्था है ।

मुझे विश्वास है कि ईश्वर दुनिया चला रहा है और उसे मेरी सलाह की कोई जरूरत नहीं है।जब दुनिया इश्वर के हाथ में है तो मुझे यकीन है कि सबकुछ अंत में अच्छा ही होगा फिर चिंता किस बात की।

आलोचना की चिंता से कैसे बचा जाये:-

पहला नियम : अनुचित आलोचना अक्सर छुपी हुई प्रशंसा होती है। प्राय : इसका यह मतलब होता है कि दूसरे
आपकी सफलता से जलने लगे हैं। याद रखें कोई भी मरे हुये कुत्ते को लात नहीं मारता ।

दूसरा नियम : अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करें; और इसके बाद अपना छाता खोल लें ताकि
आलोचना की बारिश आपके गले से बहती हुई नीचे न आ पाये।

तीसरा नियम: हम अपनी मूर्खताओं का रिकॉर्ड रखें और खुद अपनी आलोचना करें। चूंकि हम कभी आदर्श
होने की आशा नहीं कर सकते, इसलिये हम वही करें जो ई.एच. लिटिल ने किया : निष्पक्ष, सहायक,
रचनात्मक आलोचना का आग्रह करें।

थकान व चिंता रोकने और जोश व ऊर्जा बढ़ाने के छह तरीके:-

नियम 1 : थकने से पहले ही आराम कर लें।

नियम 2 : अपने काम में आराम करना सीखें।


नियम 3 : अपने घर पर आराम करना सीखें।


नियम 4 : काम करने की यह चार अच्छी आदतें अपनायें :

  1. अपनी टेबल से सारे काग़ज़ साफ़ कर लें सिवाय उनके जो उस तात्कालिक समस्या से संबंधित हों, जिस पर आप उसी दिन काम करने वाले हों।
  2. कामों को उनके महत्व के क्रम से करें।
  3.  जब आपके सामने कोई समस्या आये और अगर आपके पास निर्णय पर पहुँचने के लिये सारे तथ्य मौजूद हों, तो उसे तत्काल सुलझा लें।
  4. व्यवस्थित रखना, सौंपना और निरीक्षण करना सीखें।

नियम 5 : चिंता और थकान से बचने के लिये अपने काम में उत्साह भरें।

नियम 6 : याद रखें, कोई भी आदमी नींद की कमी के कारण कभी नहीं मरा अनिद्रा के बजाय इसकी
चिंता करते रहने से हमें ज़्यादा नुक़सान होता है।

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