लीडरशिप के प्रमुख गुण व असफलता के प्रमुख कारण | Leadership Qualities & Skills of great leader in Hindi

लीडरशिप के प्रमुख गुण व असफलता के प्रमुख कारण | Leadership Qualities & Skills of great leader in Hindi

लीडरशिप के प्रमुख गुण व असफलता के प्रमुख कारण | Leadership Qualities & Skills of great leader in Hindi
लीडरशिप के प्रमुख गुण व असफलता के प्रमुख कारण | Leadership Qualities & Skills of great leader in Hindi

           Hello Friends,आपका स्वागत है learningforlife.cc में। दोस्तों हम Successful तो हो सकते है लकिन Super Successful होने के लिए हमें अपने अंदर  Leadership Qualities और Leadership Skills Develop करनी होगी।आज नेटवर्क मार्केटिंग उभरता हुआ बिज़नेस है लकिन ज्यादातर लोग इसमें Successful नहीं हो पाते,इसका सबसे बड़ा कारण है Leadership Qualities और Leadership Skills की कमी,जो उन्हें लीडर बनने से रोकती है। इस Post में महान Author Napoleon Hill द्वारा बताया गया है कि लीडरशिप Skills और Qualities को Develop कैसे करे और लीडरशिप में असफलता के प्रमुख कारण क्या है जिनसे हमें बचना चाहिए।


लीडरशिप के दस प्रमुख गुण



लीडरशिप के महत्वपूर्ण गुण निम्नलिखित हैं :


1.अविचल साहस : यह साहस स्वयं के ज्ञान और अपने व्यवसाय के ज्ञान पर आधारित होता है। कोई भी अनुयायी (Follower) नहीं चाहता कि उसके लीडर में आत्मविश्वास और साहस का अभाव हो। कोई भी बुद्धिमान अनुयायी ऐसे लीडर को लंबे समय तक नहीं झेल पाता।

2.आत्म-नियंत्रण : वह आदमी जो खुद को नियंत्रित नहीं कर सकता, दूसरों को भी नियंत्रित नहीं कर सकता। अनुयायियों के सामने आत्म-नियंत्रण एक शक्तिशाली मिसाल बन जाता है जिसे वह अनुयायी सीख लेता है जो अधिक बुद्धिमान होता है।

3.न्यायपूर्ण आचरण : न्यायपूर्ण आचरण के बिना कोई लीडर अपने अनुयायियों का सम्मान न तो हासिल कर सकता है, न ही उसे लंबे समय तक बनाए रख सकता है।

4.निर्णय की निश्चितता : जो आदमी ढुलमुल निर्णय लेता है वह बताता है कि उसे खुद पर विश्वास नहीं है और ऐसा आदमी दूसरों का सफलतापूर्वक नेतृत्व नहीं कर सकता।

5.योजनाओं की निश्चितता : सफल लीडर अपने काम की योजना बनाता है और योजना पर काम करता है। जो लीडर व्यावहारिक और निश्चित योजनाओं के बिना केवल अंदाज़े से काम करता है वह उस जहाज की तरह होता है जिसमें रडर न हो। देर सबेर वह चट्टानों से टकराकर नष्ट हो जाएगा।

6.जितना मिले, उससे ज़्यादा देने की आदत : लीडर अपने अनुयायियों से जितने की आशा करता है उसे स्वेच्छा से उससे अधिक देने के लिए तैयार रहना चाहिए।

7.सुखद व्यक्तित्व : कोई भी बेतरतीब या लापरवाह आदमी सफल लीडर नहीं बन सकता। लीडरशिप के लिए सम्मान चाहिए। अनुयायी ऐसे लीडर का सम्मान नहीं करेंगे जिसे सुखद व्यक्तित्व के सभी तत्वों में अच्छे अंक न मिलें।

8.सहानुभूति और समझ : सफल लीडर को अपने समर्थकों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए। यही नहीं, उसे उन्हें और उनकी समस्याओं को भी समझना चाहिए।

9.पूरी ज़िम्मेदारी लेने की इच्छा : सफल लीडर को अपने समर्थकों की ग़लतियों और कमियों की पूरी ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर वह इस ज़िम्मेदारी को दूसरे पर थोप देता है तो वह लीडर नहीं बना रहेगा। अगर उसका कोई समर्थक कोई ग़लती करता है और अपने आपको अयोग्य सिद्ध करता है तो लीडर को यह मानना चाहिए कि ग़लती उसी की है और वह असफल हुआ है।

10.सहयोग : सफल लीडर को मिलकर प्रयास करने के सिद्धांत को समझ लेना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए और अपने अनुयायियों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। लीडरशिप के लिए शक्ति या सत्ता की आवश्यकता होती है और शक्ति के लिए सहयोग की।

लीडरशिप में असफलता के दस प्रमुख कारण

अब हम लीडर्स की प्रमुख ग़लतियों पर आते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि लीडर्स क्यों असफल होते हैं। यह जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि लीडर क्या न करें, जितना कि यह जानना कि लोडर क्या करें।

1.निष्ठा का अभाव : वह लीडर जो अपने सहयोगियों, अपने वरिष्ठों, अपने कनिष्ठों और अपने कार्य के प्रति वफ़ादार नहीं होता वह लंबे समय तक लीडर नहीं बना रह सकता। निष्ठाहीनता किसी भी आदमी को बहुत नीचे ले आती है और वह ज़मीन की धूल से भी नीचे हो जाता है और उसे अपमान झेलना पड़ता है जिसके वह सर्वथा योग्य है। निष्ठा का अभाव जीवन के हर क्षेत्र में असफलता का एक बहुत बड़ा कारण है।

2.विवरण व्यवस्थित करने की अयोग्यता : प्रभावी लीडरशिप के लिए आवश्यक है कि आपमें डिटेल्स को व्यवस्थित करने और उनमें पारंगत होने की योग्यता हो। कोई भी वास्तविक लीडर कभी भी इतना व्यस्त नहीं होता कि उसके पास वह काम करने का समय न हो जो उसे लीडर के रूप में करना चाहिए। जब कोई आदमी,
चाहे वह लीडर हो या अनुयायी, यह कहता है कि वह अपनी योजनाएं बदलने या किसी आपातकालीन स्थिति का सामना करने में इसलिए असमर्थ है क्योंकि वह बहुत अधिक व्यस्त है तो वह अपनी अक्षमता सिद्ध कर रहा है। सफल लीडर अपनी स्थिति से संबंधित सारे डिटेल्स में पारंगत होता है। इसका अर्थ यह है कि उसे यह आदत डाल लेनी चाहिए कि वह डिटेल्स को अपने योग्य सेनापतियों के हवाले कर दे।

3.विनम्र सेवा प्रदान करने की अनिच्छा : जब समय की माँग होती है तो वास्तविक महान लीडर्स ऐसा काम करने के लिए खुशी खुशी तैयार रहते हैं जो वे दूसरे से करने के लिए कहते है। “तुममे से सबसे महान व्यक्ति सबका सेवक होगा” एक ऐसी सच्चाई है जिसका सभी योग्य लीडर पालन और सम्मान करते हैं।

4.अपने “ज्ञान” के लिए भुगतान की उम्मीद करना बजाय इसके कि उस ज्ञान के प्रयोग के लिए भुगतान की आशा करना : दुनिया लोगों को कभी उनके “ज्ञान” के लिए भुगतान नहीं करती। आप अपने ज्ञान का क्या करते हैं या दूसरों को करने के लिए किस तरह प्रेरित करते हैं, भुगतान इसके लिए किया जाता है।

5.समर्थकों से प्रतियोगिता का डर : वह लीडर जिसे इस बात का डर हो कि उसका कोई समर्थक उसके पद को हथिया लेगा, देर-सबेर यह सुनिश्चित कर लेता है कि ऐसा ही हो। योग्य लीडर अपने अधीन काम कर रहे लोगों को प्रशिक्षित करता है ताकि वह अपनी स्थिति के डिटेल्स उन्हें सौंप सके। केवल इसी तरह लीडर अपने आपको कई गुना कर सकता है और अपने आपको कई स्थानों पर एक साथ रख सकता है और एक ही समय में कई चीज़ों का ध्यान रख सकता है। यह एक शाश्वत सत्य है कि लोगों को अपने प्रयासों से जितनी कमाई हो सकती है उससे अधिक कमाई उन्हें इस बात से होती है कि उन्हें दूसरों से प्रदर्शन करवाने की योग्यता हो। अपने काम के ज्ञान और अपने व्यक्तित्व के जादू से एक प्रभावी लीडर दूसरों की कार्यक्षमता को बहुत अधिक बढ़ा सकता है और उन्हें अधिक तथा बेहतर सेवा देने के लिए प्रेरित कर सकता है जो उसकी सहायता के बिना वे लोग नहीं दे पाते।

6.कल्पनाशीलता का अभाव : कल्पनाशीलता के बिना लीडर आपातकालीन स्थितियों का सामना करने में असमर्थ रहता है और ऐसी योजना नहीं बना पाता जिनके द्वारा वह अपने समर्थकों का प्रभावी मार्गदर्शन कर सके।

7.स्वार्थ : उस लीडर से सभी लोग चिढ़ते हैं जो अपने समर्थकों के काम का सारा श्रेय खुद ले लेता है। वास्तविक महान लीडर कभी श्रेय लेने का दावा पेश नहीं करता। वह सारा सम्मान और श्रेय अपने समर्थकों के पास जाने देता है क्योंकि वह जानता है कि अधिकांश लोग प्रशंसा और प्रतिष्ठा के लिए अधिक कठोर श्रम करेंगे, जबकि
केवल धन के लिए वे इतना कठोर श्रम नहीं करेंगे।

8.असंयम : अनुयायी असंयमी लीडर का सम्मान नहीं करते। यही नहीं, असंयम किसी भी रूप में उस आदमी की सहनशक्ति और तेजस्विता को नष्ट कर देता है जो असंयमी होता है।

9.लीडरशिप की “शक्ति” पर ज़ोर : प्रभावी लीडर प्रोत्साहन द्वारा नेतृत्व करता है और अपने समर्थकों के दिल में डर पैदा करने की कोशिश नहीं करता। जो लीडर अपने समर्थकों को अपनी सत्ता या शक्ति का डर दिखाकर प्रभावित करता है वह शक्ति द्वारा लीडरशिप वाली श्रेणी में आता है। अगर कोई लीडर सच्चा लीडर होता है तो उसे अपने व्यवहार – अपनी सहानुभूति, समझ, न्यायप्रियता और कार्यकुशलता – के अलावा किसी अन्य तरीके से
इस तथ्य का विज्ञापन करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

10.ओहदे पर ज़ोर : योग्य लीडर को अपने समर्थकों का सम्मान हासिल करने के लिए किसी ओहदे या पदवी की ज़रूरत नहीं होती। वह आदमी जो ओहदे को महत्व देता है दरअसल उसके पास आम तौर पर महत्व देने के लिए और कुछ नहीं होता। वास्तविक लीडर के ऑफिस के दरवाज़े उन सभी लोगों के लिए खुले रहते हैं जो अंदर प्रवेश करना चाहते हैं और उसके काम करने का स्थान औपचारिकता और दिखावे से मुक्त होता है।

यह लीडरशिप में असफलता के सबसे आम कारण हैं। इनमें से कोई भी ग़लती आपको असफल कराने के लिए पर्याप्त है। अगर आप लीडर बनना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आप यह ग़लतियाँ न करें तो इस सूची का सावधानी से अध्ययन करें।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *