सोचिये और अमीर बनिए | Think and Grow Rich by Napoleon Hill Book Summary In Hindi

सोचिये और अमीर बनिए | Think and Grow Rich by Napoleon Hill Book Summary In Hindi

सोचिये और अमीर बनिए | Think and Grow Rich by Napoleon Hill Book Summary In Hindi
सोचिये और अमीर बनिए | Think and Grow Rich by Napoleon Hill Book Summary In Hindi

         Hello Friends,आपका स्वागत है learningforlife.cc में। “सोचिये और अमीर बनिए (Think and Grow Rich) by Napoleon Hill” Book की Summary यहा दी जा रही है जो अमीर बनने की रहा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

1.विचार ही वस्तु हैं 

         यह सच है कि “विचार ही वस्तु हैं” और बेहद शक्तिशाली वस्तु हैं, जब उनके साथ निश्चित लक्ष्य हों, लगन हो और उनके सहारे दौलत या किसी दूसरी भौतिक वस्तु को हासिल करने की प्रबल इच्छा जुड़ी हुई हो।

        बाधाएँ ज़्यादातर लोगों का हौसला पस्त कर देतीं और वे अपनी इच्छा को हकीकत में बदलने की कोई कोशिश ही नहीं करते।अगर लोग अपने लक्ष्य को निश्चित कर लें और एकाग्रता व संपूर्ण समर्पण से उसे प्राप्त करने में जुट जाएँ, तो लोगों की क़िस्मत बदल सकती है।

         जब अवसर आता, तो वह ऐसे रूप में आता और ऐसी दिशा से आता, जिसकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की होगी। अवसर इंसानों के साथ अक्सर इस तरह की चालबाज़ी करता है। अवसर पिछले दरवाज़े से चुपचाप घुस आता है और अक्सर यह दुर्भाग्य या अस्थाई पराजय के वेष में आता है। शायद इसीलिए बहुत सारे लोग अवसर को पहचान नहीं पाते।

         असफलता का एक आम कारण यह है कि लोग अस्थाई पराजय के बाद मैदान छोड़ देते हैं। हर व्यक्ति कभी न कभी यह ग़लती ज़रूर करता है।

         किसी भी इंसान के जीवन में सफलता आने से पहले उसके जीवन में अस्थाई पराजय या असफलता ज़रूर आती है। जब आदमी पराजित हो जाता है तो सबसे आसान रास्ता यही होता है कि मैदान छोड़ दिया जाए। और  ज़्यादातर लोग यही करते हैं।

        लोगों को महानतम सफलता उस मोड़ पर मिली जब वे हार चुके थे और हारने के बिंदु से एक क़दम आगे ही सफलता उनका इंतज़ार कर रही थी। सफलता बहुत चालाक और मजाकिया किस्म की होती है। इसे लोगों को तब गिराने में मज़ा आता है जब सफलता उनके बहुत क़रीब होती है

        सफलता हासिल करने के लिए इंसान को एक- सिर्फ एक – दमदार विचार की ही ज़रूरत होती है। इस Post (video) में दिए गए सिद्धांत ऐसे तरीके और नुस्खे बताते हैं जिनके प्रयोग से उपयोगी विचार उत्पन्न हो सकते हैं।

जब दौलत आती है तो इतनी तेज़ी से आती है, और इतनी ज़्यादा आती है कि आदमी हैरान हो जाता है कि गरीबी के इतने सालों में वह कहाँ छुपी हुई थी।

          यह वाक्य हैरान करने वाला है। यही नहीं, यह उस लोकप्रिय विश्वास के विरुद्ध भी है जिसका मानना है कि दौलत सिर्फ़ उ्हीं लोगों को मिलती है जो कड़ी मेहनत करते हैं और लंबे समय तक करते हैं।

इंसान का मस्तिष्क जो सोच सकता है और जिसमें यकीन कर सकता है उसे वह हासिल कर सकता है

2. इच्छा

         हम तभी सफल होते है जब एक निश्चित लक्ष्य चुनते,और उस लक्ष्य को हासिल करने में अपनी सारी ऊर्जा, इच्छाशक्ति,प्रयास- हर चीज़ झोंक दी। इच्छा को इस कहानी से समझते है :-

         काफ़ी समय पहले एक महान योद्धा के सामने एक ऐसी परिस्थिति आई जिसमें उसके लिए यह आवश्यक हो गया कि वह युद्ध में अपनी सफलता सुनिश्चित कर ले। वह अपनी सेना को शक्तिशाली सेना के ख़िलाफ़ भेजने
वाला था और दुश्मन के सैनिकों की संख्या ज्यादा थी। उसने अपने सैनिकों को जहाज़ों में भरा, दुश्मन देश तक समुद्र का सफ़र किया, सिपाहियों और गोला-बारुद को उतारा और फिर उन जहाज़ों को जलाने का आदेश दिया
जो उन्हें वहाँ तक लाए थे। युद्ध के पहले अपने सैनिकों को संबोधित करते हुए उसने कहा, “आप देख रहे हैं कि जहाज जला दिए गए हैं। इसका मतलब है कि हम यहाँ से तब तक ज़िंदा नहीं लौट सकते, जब तक कि हम जीत न जाएँ। हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। या तो हम जीतेंगे-या फिर हम मर जाएंगे !”


वे जीत गए।

        हर वह आदमी जो किसी काम में जीत हासिल करना चाहता है उसे अपने जहाज़ जलाने के लिए तैयार रहना चाहिए और अपने पीछे हटने के सारे रास्ते बंद करने का इच्छुक रहना चाहिए। यही करके आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके मस्तिष्क में जीतने की वह धधकती हुई प्रबल इच्छा बनी रहेगी जो कि सफलता के लिए अनिवार्य है।

        आप यह भी जान लें कि आप ढेर सारी दौलत कभी नहीं कमा सकते, अगर आपमें अमीर बनने की प्रबल इच्छा नहीं है और अगर आप वास्तव में यह विश्वास नहीं करते कि यह दौलत आपके पास होगी।

मस्तिष्क की कोई सीमाएँ नहीं हैं, सिवाय उनके जिन्हें हम मान लेते हैं। गरीबी और अमीरी दोनों ही विचार की संतानें हैं।

3.आस्था

         आस्था मस्तिष्क की हेड केमिस्ट है। जब आस्था को विचार के साथ मिलाया जाता है तो अवचेतन मस्तिष्क तत्काल इस कंपन को भाँप लेता है, इसे इसके आध्यात्मिक समतुल्य (Spiritual equivalent) में बदल लेता है और इसे अनंत प्रज्ञा (infinite intelligence) को संप्रेषित कर देता है, जैसा कि प्रार्थना के साथ होता है।

          ऐसे करोड़ों लोग हैं जो यह मानते हैं कि वे ग़रीबी और असफलता में जीने के लिए इसलिए अभिशप्त हैं क्योंकि कोई रहस्यमयी शक्ति उनके खिलाफ़ काम कर रही है, जिस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। इस नकारात्मक आस्था या विश्वास के कारण वे अपने दुर्भाग्य के निर्माता खुद होते हैं, क्योंकि उनका अवचेतन मस्तिष्क उनके इस नकारात्मक विश्वास को पकड़ लेता है और इसे भौतिक समतुल्य का रुप दे देता है।

         यदि आप अपनी इच्छा को हकीक़त में बदलना चाहते हैं तो आप उसे अपने अवचेतन मस्तिष्क तक पहुँचा दें। परंतु इसके लिए यह जरूरी है कि आपकी वह इच्छा प्रबल और आशावादी हो।

  • आस्था ही वह “अमृत” है जो विचार के आवेग को जीवन, शक्ति और क्रियाशीलता प्रदान करता है!
  • आस्था धन कमाने का शुरुआती बिंदु है!
  • आस्था उन सभी “चमत्कारों” और सभी रहस्यों का आधार है जिन्हें विज्ञान के नियमों के आधार पर स्पष्ट नहीं किया जा सकता!
  • आस्था सफलता का इकलौता इलाज है!
  • आस्था वह तत्व, व “रसायन” है जिसे जब प्रार्थना के साथ मिलाया जाता है तो इंसान अनंत प्रज्ञा के साथ सीधा संवाद करता है।
  • आस्था वह तत्व है जो इंसान के सीमाबद्ध मस्तिष्क (finite mind) द्वारा निर्मित विचारों के आम कंपनों को आध्यात्मिक समतुल्य में रूपांतरित करता है।
  • आस्था इकलौता माध्यम है जिसके द्वारा इंसान अनंत प्रज्ञा की वैश्विक शक्ति का दोहन और प्रयोग कर सकता है।

4.आत्मसुझाव

         आत्मसुझाव की श्रेणी में वे सारे सुझाव और स्वयं को दिए गए वे सारे उद्दीपन आते हैं जो हमारी पाँचों इंद्रियों के माध्यम से हमारे मस्तिष्क तक पहुंचते हैं। दूसरी तरह से कहा जाए तो आत्मसुझाव स्वयं को दिया गया सुझाव है। यह अवचेतन मस्तिष्क और चेतन मस्तिष्क के बीच संवाद का प्रमुख माध्यम है।

         आत्मसुझाव के सिद्धांत का प्रयोग करने की आपकी योग्यता बहुत हद तक इच्छा पर एकाग्रचित्त होने की आपकी क्षमता पर निर्भर करेगी जब तक कि यह इच्छा धधकती हुई आग की तरह प्रबल न हो जाए।

          आपके अवचेतन मस्तिष्क को प्रेरित करने के लिए कहे :

“मुझे विश्वास है कि मेरे पास इतना पैसा होगा। मेरी आस्था इतनी दृढ़ है कि मैं इस धन को अपनी आँखों के सामने अभी देख सकता हूँ। मैं इसे अपने हाथों से छू सकता हूँ। यह मेरा इंतज़ार कर रहा है कि यह मेरे पास आए और उस अनुपात में आए जिस अनुपात में मैं अपनी सेवाएँ दूंगा। मैं उस योजना का इंतज़ार कर रहा हूँ जिसके द्वारा मैं इतना धन कमा सकूँ और जब मुझे वह योजना मिलेगी तो मैं उस पर अमल करना शुरू कर दूंगा।”

          कई दार्शनिकों ने यह कहा है कि इंसान इस धरती पर अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है परंतु उनमें से अधिकांश यह कहना भूल गए हैं कि वह अपने भाग्य का निर्माता क्यों है। इंसान अपने भाग्य का, ख़ासकर आर्थिक भाग्य का निर्माता किस तरह बन सकता है। इंसान स्वयं का और अपने आस-पास के माहौल का निर्माता बन सकता है क्योंकि उसके पास अपने अवचेतन मस्तिष्क को प्रभावित करने की शक्ति है।

हर मुश्किल,हर असफलता,हर दुख में इसके बराबर या इससे बड़े लाभ का बीज छुपा होता है।

5.विशेषज्ञीय ज्ञान

         ज्ञान दो तरह का होता है। एक है सामान्य ज्ञान, दूसरा है विशिष्ट ज्ञान। सामान्य ज्ञान चाहे कितनी भी मात्रा या विविधता में हो, धन के संग्रह में यह अधिक उपयोगी नहीं होता। इंसान की सभ्यता में सामान्य ज्ञान के जितने रूप हो सकते हैं, बड़े विश्वविद्यालयों में यह सभी रूप पाए जाते हैं। ज्यादातर प्रोफेसर के पास बहुत कम पैसा होता है। ज्ञान देना उनकी विशेषज्ञता है, परंतु वे इस ज्ञान के संगठन (organization) या उपयोग के विशेषज्ञ नहीं होते।

        ज्ञान से पैसा नहीं आता, जब तक कि धन के संग्रह का लक्ष्य न बनाया जाए और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्य की व्यावहारिक योजना बनाकर इस ज्ञान को संगठित न किया जाए और बुद्धिमानीपूर्वक इसका प्रयोग न किया जाए। इस तथ्य की समझ का अभाव ही वह सबसे बड़ा कारण है जिसकी वजह से लाखों-करोड़ों लोग इस ग़लत धारणा में विश्वास रखते हैं कि “ज्ञान ही शक्ति है।” ऐसी कोई बात नहीं है! ज्ञान केवल संभावित शक्ति है। यह शक्ति तभी बनता है जबकि इसे कार्य की निश्चित योजनाओं में संगठित किया जाए और किसी निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इसका उपयोग किया जाए।

         कई लोग यह मानने की ग़लती करते हैं कि चूँकि हैनरी फ़ोर्ड बहुत कम समय के लिए स्कूल गए थे, इसलिए उनके पास “शिक्षा” कम थी। जो लोग यह ग़लती करते हैं वे दरअसल शिक्षा का सही अर्थ नहीं समझ पाए हैं। “एज्युकेशन” शब्द लेटिन शब्द “एज्युको” से बना है जिसका अर्थ है बाहर लाना या अंदर से विकसित करना।

         यह जरूरी नहीं है कि वही व्यक्ति शिक्षित हो जिसके पास सामान्य या विशिष्ट ज्ञान की प्रचुरता हो। शिक्षित आदमी वह होता है जिसने अपने मस्तिष्क को इस तरह से विकसित कर लिया है कि वह जो चाहता है उसे हासिल कर सकता है और इस प्रक्रिया में वह दूसरों के अधिकारों का हनन नहीं करता।

        अगर आपमें कल्पना है तो यह Post आपको एक विचार प्रदान कर सकता है जिससे आपको वह दौलत मिलनी शुरू हो जाएगी जिसकी आप इच्छा रखते हैं। याद रखें, विचार ही प्रमुख वस्तु है। विशेषज्ञीय ज्ञान आपको किसी भी नुक्कड़ पर मिल सकता है- किसी भी नुक्कड़ पर!

6.कल्पना

        कल्पना सचमुच वह वर्कशॉप है जहाँ इंसान द्वारा बनाए गए सभी प्लान सही आकार में ढलते हैं। यहाँ मस्तिष्क की कल्पना की शक्ति द्वारा इच्छा को आकार, रूप और कार्यरूप दिया जाता है।

यह कहा गया है कि इंसान जिस चीज़ की कल्पना कर सकता है, वह उसकी रचना भी कर सकता है।

        अपनी कल्पना शक्ति की मदद से इंसान ने पिछले पचास वर्षों के दौरान प्रकृति की शक्तियों को जितना खोजा है और उनका जितना दोहन किया है उतना इससे पहले मानव जाति के पूरे इतिहास में नहीं हुआ। उसने हवा को पूरी तरह से जीत लिया है और उड़ने के मामले में पक्षियों को बुरी तरह पीछे छोड़ दिया है। कल्पना की मदद से यह निर्धारित कर लिया है कि सूर्य किन तत्वों द्वारा बना है। उसने वाहनों की गति बढ़ा ली है और अब वह 965 किलो मीटर प्रति घंटे से भी अधिक की रफ्तार से यात्रा कर सकता है।

        बिज़नेस, उद्योग, फाइनेंस के महान लीडर और महान कलाकार, संगीतकार, कवि और लेखक महान इसलिए बनते हैं क्योंकि उन्होंने रचनात्मक कल्पना की शक्ति को विकसित कर लिया है।

7.सुव्यवस्थित योजना

        आपने सीखा है कि इंसान जो भी हासिल करता है वह इच्छा के रूप में शुरू होता है। इच्छा ही हमें यात्रा के पहले दौर में ले जाती है, कल्पना की वर्कशॉप में ले जाती है, जहाँ इस रूपांतरण की योजनाएँ बनाई जाती है और व्यवस्थित की जाती हैं।

इन निर्देशो की मदद से आप व्यावहारिक योजनाएँ बना सकते हैं :

  • धन कमाने की आपकी योजना के बनने और पूरे होने में आपको जितने लोगों के समूह की आवश्यकता हो उतने लोगों से जुड़े, आगे Post में बताए गए तरीके से “मास्टरमाइंड” सिद्धांत का प्रयोग करें (इस निर्देश का पालन करना बिलकुल अनिवार्य है। इसे नज़रअंदाज़ न करें।)
  • अपना ” मास्टर माइंड ” समूह बनाने से पहले यह फैसला करें कि आप अपने समूह के सदस्यों को उनके सहयोग के बदले में क्या लाभ दे सकते हैं। कोई भी व्यक्ति किसी मुआवजे के बिना अनंत काल तक काम नहीं करेगा। 
  • सप्ताह में कम से कम दो बार और जितना अधिक संभव हो अपने “मास्टर माइंड” समूह के सदस्यों से मिलें जब तक कि आप मिलकर धन कमाने के लिए आवश्यक योजनाएं पूरी तरह से न बना लें।
  • अपने “मास्टर माइंड” समूह के हर सदस्य के साथ आपका तालमेल आदर्श होना चाहिए। अगर आप इस निर्देश का पूरी तरह पालन नहीं करेंगे तो आप असफल हो सकते हैं। “मास्टर माइंड” सिद्धांत वहाँ पर सफल नहीं हो सकता जहाँ पूरा तालमेल न हो।

         अल्पकालिक पराजय का एक ही अर्थ होना चाहिए और वह यह कि आपकी योजना में किसी ख़ास क़िस्म के ज्ञान की कमी थी। लाखों-करोड़ों लोग गरीबी और दुख भरा जीवन बिताते हैं क्योंकि उनके पास कोई दमदार
योजना नहीं होती जिसके द्वारा वे धन कमा सकें।

        आपकी योजनाएं जितनी दमदार होंगी, आपकी उपलब्धि उतनी ही होगी।

        कोई भी आदमी तब तक नहीं हारता जब तक कि वह मैदान न छोड़ दे- जब तक कि वह अपने मन में हिम्मत न हार जाए।


सफलता को स्पष्टीकरण देने की ज़रूरत नहीं होती।असफलता बहाने बनाने की अनुमति नहीं देती।

8. निर्णय

           25,000 असफल पुरुषों और महिलाओं के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया कि निर्णय का अभाव असफलता के प्रमुख कारणों में सबसे ऊपर है।

         टालमटोल की आदत, जो निर्णय करने की विरोधी है, एक आम शत्रु है जिसे हर आदमी को जीतना चाहिए।

          जब आप यह Post पढ़ना समाप्त करेंगे और इसमें बताए गए सिद्धांतों को कार्यरूप में बदलने के लिए तैयार होंगे तो आपको तत्काल और निश्चित निर्णय पर पहुँचने की अपनी क्षमता को जाँचने का अवसर मिलेगा।

         उन सैकड़ों लोगों जिन्होंने दौलत कमाई है, यह तथ्य सामने आया कि उनमें से हर एक में तत्काल निर्णय पर पहुँचने की आदत थी और इन निर्णयों को अगर बदलना होता था तो वे इन्हें बदलने में जल्दबाज़ी नहीं करते थे। जो लोग दौलत कमाने में असफल थे उनमें से हर एक, बिना अपवाद के, या तो निर्णय लेता ही नहीं था और अगर लेता भी था तो उसमें बहुत देर लगाता था, परंतु वह लिए गए निर्णय अक्सर बदल लेता था और इसमें जल्दबाज़ी का परिचय देता था।

         जो लोग तत्काल और निश्चित निर्णय पर पहुँचते हैं वे जानते हैं कि वे क्या चाहते हैं और आम तौर पर यह उन्हें मिल जाता है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में लीडर्स तत्काल और दृढ़ता से निर्णय लेते हैं। यही वह सबसे प्रमुख कारण है कि वे लीडर्स होते हैं। दुनिया में उस आदमी को जगह देने की आदत होती है जिसके शब्दों और कार्यों से पता चलता है कि वह जानता है कि वह कहाँ जा रहा है।

9.लगन

           इच्छाशक्ति और प्रबल इच्छा जब सही तरीके से मिल जाते हैं तो एक ऐसा युग्म बन जाता है जिसका कोई तोड़ नहीं है। जो लोग बेहद अमीर बनते हैं उनमें इच्छाशक्ति होती है जिसे वे लगन के साथ मिला देते हैं और इस तरह वे अपने लक्ष्यों को हासिल करना सुनिश्चित कर लेते हैं।

           ज़्यादातर लोग पहली मुश्किल या पहली मुसीबत सामने आते ही अपने लक्ष्यों और इरादों को दूर फेंक देते हैं। कुछ लोग सारे विरोध के बावजूद आगे बढ़ते हैं जब तक कि वे अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर लेते।

            जिन्होंने लगन की आदत डाली है उन्होंने एक तरह से असफलता का बीमा करा लिया है। चाहे वे कितनी ही बार असफल हो जाएँ परंतु वे आखिरकार सीढ़ी के शिखर पर पहुँच ही जाते हैं। कई बार ऐसा लगता है जैसे कोई छुपा हुआ मार्गदर्शक कहीं पर है जो निराशाजनक अनुभवों के द्वारा लोगों को परखता है। जो लोग हारने के बाद अपने आपको उठा लेते हैं और कोशिश करना जारी रखते हैं और अंतत: सफल हो जाते हैं उनसे दुनिया कहती है, “शाबाश! हम जानते थे कि तुम यह कर सकते हो।” छुपा हुआ मार्गदर्शक लगन के इम्तहान से गुज़रे बिना किसी को भी महान उपलब्धि का आनंद नहीं लेने देता। जो लोग यह इम्तहान नहीं देते वे इसमें उत्तीर्ण भी नहीं होते।

           लगन की आदत डालने के चार आसान क़दम हैं। इनके लिए यह आवश्यक नहीं है कि आपमें बहुत बुद्धि हो, या आप उच्च शिक्षित हों या आपको इसमें बहुत समय या प्रयास देना पड़े। आवश्यक क़दम हैं :

  •  निश्चित लक्ष्य जिसके पीछे इसकी प्राप्ति की प्रबल इच्छा हो।
  • एक निश्चित योजना जिस पर लगातार काम किया जाए।
  • एक मस्तिष्क जो सभी नकारात्मक और हतोत्साहित करने वाले प्रभावों की तरफ़ से कसकर बंद हो, जिनमें रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों के नकारात्मक सुझाव भी शामिल है।
  • एक या एक से अधिक ऐसे व्यक्तियों के साथ मित्रतापूर्ण गठबंधन जो आपकी योजना और लक्ष्य को लेकर आपको प्रोत्साहित करें।

10.मास्टर माइंड की शक्ति

          योजनाएं तब तक निष्क्रिय और व्यर्थ हैं जब तक कि उन्हें कार्य रूप में रूपांतरित करने की पर्याप्त शक्ति न हो। यह Post वह तरीका बताएगा  जिसके द्वारा कोई व्यक्ति शक्ति हासिल कर सकता है और उसका उपयोग कर सकता है।

         “मास्टर माइंड” को इस तरह परिभाषित किया जा सकता है : “किसी निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दो या दो से अधिक लोगों का सद्भाव की भावना के साथा ज्ञान और प्रयोग का आयोजन।”

         कोई भी अकेला व्यक्ति बिना “मास्टर माइंड” की मदद के बड़ी शक्ति हासिल नहीं कर सकता। अगर आप लगन और बुद्धि से इन निर्देशों का पालन करेंगे और अपने “मास्टर माइंड” समूह के चयन में सावधानी रखेंगे तो आप यह मान लें कि आपने आधा सफ़र तय कर लिया है।

          कारनेगी का मास्टर माइंड समूह लगभग पचास लोगों के स्टाफ से मिलकर बना था जिसे उन्होंने अपने चारों तरफ इकट्ठा किया था और उनका निश्चित लक्ष्य स्टील बनाना और उसे बेचना था। उन्होंने अपनी पूरी दौलत का श्रेय उस शक्ति को दिया जो उन्होंने अपने मास्टर माइंड द्वारा हासिल की थी।

सुख करने में मिलता है,
सिर्फ स्वामित्व में नहीं मिलता।

11.सेक्स रुपांतरण का रहस्य

        “रुपांतरण” शब्द का आसान भाषा में अर्थ है, “किसी तत्व या ऊर्जा के प्रकार को दूसरे रूप में बदलना या
परिवर्तित करना।”

        सेक्स की इच्छा सभी मानवीय इच्छाओं में सबसे शक्तिशाली इच्छा है। इस इच्छा के द्वारा संचालित होने पर इंसान प्रखर कल्पनाशीलता,साहस, इच्छाशक्ति, लगन और रचनात्मक योग्यता विकसित कर लेता है जो अन्य समय में उसके पास नहीं होतीं। सेक्शुअल संपर्क की इच्छा इतनी प्रबल और शक्तिशाली होती है कि इसकी संतुष्टि के लिए लोग जीवन और प्रतिष्ठा गँवाने का जोखिम मोल लेते हैं। यदि इसका दोहन किया जाए और इसे अन्य दिशाओं में मोड़ा जाए तो यह प्रेरक शक्ति अपने सभी तत्वों जैसे प्रखर कल्पनाशीलता, साहस इत्यादि को बनाए रखती है। इन सशक्त रचनात्मक शक्तियों का प्रयोग साहित्य, कला या किसी भी अन्य व्यवसाय में किया जा सकता है जिनमें अमीर बनना भी शामिल है।

         नदी पर बांध बनाया जा सकता है और कुछ समय के लिए इसके पानी को नियंत्रित किया जा सकता है, परंतु अंतत: यह पानी बाहर निकलने का रास्ता बना ही लेगा। यही सेक्स के भाव के बारे में सच है। इसे कुछ समय के लिए दबाया या नियंत्रित किया जा सकता है, परंतु अभिव्यक्ति के साधन खोजना इसकी प्रकृति में है। अगर इसे किसी रचनात्मक प्रयास में रूपांतरित न किया जाए, तो यह कोई कम महत्वपूर्ण निकास खोज लेगा।

          Author कहते है  मेने 25,000 से अधिक लोगों के विश्लेषण से यह खोजा कि जो लोग बेहद सफल होते हैं वे चालीस साल से कम उम्र में शायद ही कभी ऐसा कर पाते हैं और अक्सर वे तब तक अपनी सही गति में नहीं आते जब तक कि वे पचास से अधिक की उम्र के न हो जाएँ। ये तथ्य इतना आश्चर्यचकित करने वाला था कि मैं इसके कारणों का अधिक सावधानी से अध्ययन करने के लिए प्रेरित हुआ।

          इससे यह तथ्य उजागर हुआ कि वह सबसे बड़ा कारण जिसकी वजह से अधिकांश लोग चालीस से पचास साल की उम्र से पहले इतने सफल नहीं हो पाते दरअसल यह प्रवृत्ति है कि वे सेक्स के भाव की शारीरिक अभिव्यक्ति में अधिक संलग्न रहते हैं। अधिकांश लोग कभी यह नहीं सीख पाते कि सेक्स की आकांक्षा की अन्य संभावनाएँ भी हैं जो महत्व में इसकी शारीरिक अभिव्यक्ति से बढ़कर हैं।

12.अवचेतन मस्तिष्क

          अवचेतन मस्तिष्क चेतना का वह क्षेत्र है जिसमें चेतन मस्तिष्क तक पाँचों इंद्रियों में से किसी भी इंद्रिय द्वारा पहुँचने वाले विचार का हर संवेग रिकॉर्ड होता है और जहाँ से विचार उसी तरह दुबारा निकाले जा सकते हैं जिस तरह पत्रों को फ़ाइलिंग कैबिनेट में से निकाला जा सकता है।

          आप अपने अवचेतन मस्तिष्क को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकते, परंतु आप इसे अपनी इच्छा अनुसार कोई भी योजना, इच्छा या लक्ष्य दे सकते है जिसे आप मूर्त रूप में रूपांतरित देखना चाहते हैं।

          अवचेतन मस्तिष्क ख़ाली नहीं बैठेगा! अगर आप इच्छाओं को अपने अवचेतन मस्तिष्क में बोने में असफल रहते हैं तो यह उन विचारों के अनुसार कार्य करेगा जो इस तक आपकी लापरवाही के परिणामस्वरूप पहुँचते हैं। नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही तरह के विचार लगातार अवचेतन मस्तिष्क तक पहुंच रहे हैं।

           सात प्रमुख सकारात्मक भावों और सात प्रमुख नकारात्मक भावों का वर्णन किया जा रहा है ताकि अपने अवचेतन मस्तिष्क को निर्देश देते समय आप सकारात्मक भावों का अधिक प्रयोग करें और नकारात्मक भावों से बचें।

सात प्रमुख सकारात्मक भाव

  • इच्छा का भाव
  • आस्था का भाव
  • प्रेम का भाव
  • सेक्स का भाव
  • उत्साह का भाव
  • रोमांस का भाव
  • आशा का भाव

सात प्रमुख नकारात्मक भाव (जिनसे बचना है)

  • डर का भाव
  • ईर्ष्या का भाव
  • घृणा का भाव
  • प्रतिशोध का भाव
  • लालच का भाव
  • अंधविश्वास का भाव
  • क्रोध का भाव

           सकारात्मक और नकारात्मक भाव मस्तिष्क में एक ही समय में एक साथ नहीं रह सकते। या तो एक अधिक प्रबल होगा या फिर दूसरा। यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप यह सुनिश्चित कर लें कि सकारात्मक भाव आपके मस्तिष्क को प्रबलता से प्रभावित करें।

           
केवल इन निर्देशों का पूरी तरह पालन करने से ही और लगातार करने से ही आप अपने अवचेतन मस्तिष्क पर नियंत्रण पा सकते हैं। आपके चेतन मस्तिष्क में एक भी नकारात्मक भाव मौजूद हो तो यह अवचेतन मस्तिष्क से रचनात्मक सहायता पाने के सभी अवसरों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है।

कोई भी अमीरी की चाह रख सकता है और ज़्यादातर लोग रखते हैं,परंतु केवल कुछ ही जानते हैं कि एक निश्चित योजना और दौलत की धधकती प्रबल इच्छा ही दौलत कमाने के भरोसेमंद साधन हैं।

13.मस्तिष्क

         रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सिद्धांत की तरह ही हर इंसान का मस्तिष्क भी दूसरे मस्तिष्कों द्वारा प्रसारित किए जा रहे विचार संवेगों को पकड़ने में सक्षम होता है।

        अवचेतन मस्तिष्क मस्तिष्क का “ब्रॉडकास्ट स्टेशन” है जिसके द्वारा विचार के कंपन प्रसारित किए जाते हैं रचनात्मक कल्पनाशीलता वह रिसीविंग सेट” है जिसके द्वारा विचार की ऊर्जा पकड़ी जाती है।

सफलता की सीढ़ी पर ऊपर की तरफ कभी भीड़ नहीं रहती।

14. छ्ठी इन्द्रिय

          छठी इंद्रिय अवचेतन मस्तिष्क का वह हिस्सा है जिसे रचनात्मक कल्पनाशीलता कहा गया है। इसे वह “रिसीविंग सेट” कहा गया है जिसके द्वारा विचार और योजनाएं हमारे दिमाग में कौंधते हैं। इन कौंधों को कई बार प्रेरणा या आभास कहा जाता है।

          छठी इंद्रिय की सहायता से आपको आने वाले खतरे की चेतावनी मिलती है ताकि आप समय रहते उनसे बच सकें और आपको समय पर अवसरों की सूचना मिल जाती है ताकि आप उन्हें गले लगा सकें।

         छठी इंद्रिय के विकास के साथ ही आपकी सहायता और आपकी सेवा के लिए एक “रक्षक देवदूत” आ जाता है जो आपके सामने बुद्धिमानी के मंदिर के द्वार हमेशा के लिए खोल देता है।

महान लोगों को अपने जीवन को आकार देने दें : 

         तरीक़ा यह था। हर रात को सोने से ठीक पहले Author अपनी आँखें बंद कर लेता था और अपनी कल्पना में इन नौ लोगो को (इमर्सन, पेन, एडिसन, डार्विन, लिंकन, बरबैंक, नेपोलियन, फ़ोर्ड और कारनेगी) को अपने साथ एक परामर्श मेज़ के चारों तरफ़ बैठा देखता था। यहाँ मुझे न सिर्फ उनके साथ बैठने का अवसर था जिन्हें मैं महान समझता था, बल्कि मैं उस समूह में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति भी था, क्योंकि मैं उस समूह का चेयरमैन था।

          इन रात्रिकालीन बैठकों के द्वारा मेरा लक्ष्य अपने चरित्र को नए सिरे से बनाना था ताकि यह मेरे काल्पनिक सलाहकारों के चरित्रों का संयोग बन जाए।

15.डर के छह भूत

          छठी इंद्रिय तब तक काम नहीं करेगी जब तक कि अनिर्णय, शंका और डर यह तीनों शत्रु या इनमें से एक भी आपके दिमाग में बने रहेंगे। इस दुष्ट त्रिमूर्ति के सदस्य आपस में क़रीबी रूप से जुड़े हैं। जहाँ एक मिलेगा, बाक़ी के दो भी वहीं आस-पास ही मिलेंगे।

          अनिर्णय डर का अंकुर है। अनिर्णय शंका में बदलता है, फिर यह दोनों मिल जाते हैं और डर बन जाते हैं। अक्सर यह मिलने की प्रक्रिया धीमी होती है। यह भी एक कारण है कि यह तीनों शत्रु इतनी खतरनाक क्यों होते हैं। वे अंकुरित होते हैं और बढ़ते रहते हैं और हमें उनकी उपस्थिति का पता तक नहीं चलता।

छह मूलभूत डर

  • गरीबी का डर
  • आलोचना का डर
  • बुरे स्वास्थ्य का डर
  • प्रेम के विछोह का डर
  • बुढ़ापे का डर
  • मौत का डर

डर मानसिक अवस्था से अधिक कुछ नहीं हैं। किसी की मानसिक अवस्था को नियंत्रित किया जा सकता है और उसे दिशा भी दी जा सकती है।

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यह “सोचिये और अमीर बनिए (Think and Grow Rich) by Napoleon Hill” Book की Summary है। यदि detail में पड़ना चाहते है तो इस Book को यहां से खरीद सकते है :-

सोचिये और अमीर बनिए | Think and Grow Rich by Napoleon Hill Book Summary In Hindi

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