जीत आपकी | You Can Win By Shiv Khera – इंसान को क़ामयाब बनाने वाली ख़ूबियाँ

इंसान को क़ामयाब बनाने वाली ख़ूबियाँ | QUALITIES THAT MAKE A PERSON SUCCESSFUL

जीत आपकी | You Can Win By Shiv Khera - इंसान को क़ामयाब बनाने वाली ख़ूबियाँ
जीत आपकी | You Can Win By Shiv Khera – इंसान को क़ामयाब बनाने वाली ख़ूबियाँ 

          💕Hello Friends,आपका स्वागत है learningforlife.cc में। हम सभी जीतना और सफल होना चाहते है। लकिन सफलता इन्तिफ़ाक़ से नहीं मिलती बल्कि हम उसका चुनाव करते है।ऐसा क्यों होता है कि कोई अपनी सफलता की कहानिया लिखते जाते है जबकि दूसरे तैयारी ही करते रह जाते है ? कोई इंसान एक के बाद दूसरी रुकावटों को पार करता हुआ अपने Goal को प्राप्त कर लेता है, जबकि दूसरे लोग संघर्ष ही करते रह जाते हैं, और कहीं नहीं पहुँच पाते? इस Post में जीत आपकी  यानी  You Can Win By Shiv Khera Book  से जीत हासिल करने के तरीक़े बताये जा रहे है तो इस Post को लास्ट तक पढ़े :-

1. इच्छा (Desire)

         एक युवक ने सुकरात से सफलता का रहस्य पूछा? सुकरात ने उससे दूसरे दिन सुबह नदी के किनारे मिलने के लिए कहा। दूसरे दिन युवक सुकरात से मिलने नदी के किनारे पहुँचा, तो उन्होंने उसे नदी की ओर चलने के लिए कहा। जब पानी उनकी गर्दन तक पहुँच गया, तो सुकरात ने अचानक युवक का सिर पानी में डुबो दिया। युवक पानी से बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगा, पर सुकरात काफ़ी मज़बूत थे। उन्होंने युवक को पानी में डुबोए रखा। युवक का शरीर जब नीला पड़ने लगा, तब सुकरात ने उसका सिर पानी से बाहर निकाला। सिर पानी से बाहर निकलते ही युवक ने सबसे पहले हवा में एक गहरी सांस ली। सुकरात ने युवक से पूछा, “जब तुम पानी के अंदर थे, तो तुम्हें किस चीज़ की ज़रूरत सबसे ज़्यादा महसूस हो रही थी?” युवक ने जवाब दिया, “हवा की।” सुकरात ने कहा, “सफलता का यही रहस्य है। जब तुम्हें सफलता हासिल करने की वैसी ही तीव्र इच्छा होगी, जैसी कि पानी के अंदर हवा के लिए हो रही थी, तब तुम्हें सफलता मिल जाएगी।”

        गहरी इच्छा हर उपलब्धि की शुरूआती बिंदु होती है। जिस तरह आग की छोटी लपटें अधिक गर्मी नहीं दे सकतीं, वैसे ही कमज़ोर इच्छा बड़े नतीजे नहीं दे सकती।

2. वचनबद्धता (Commitment)

        वचनबद्धता की इमारत ईमानदारी और समझदारी के खंभों पर टिकी होती है। समृद्धि और सफलता हमारे विचारों और फ़ैसलों का नतीजा होती हैं। हमारे जीवन को कैसे विचार प्रभावित करेंगे, इसका फ़ैसला हमें ही करना है। सफलता इत्तिफ़ाक से नहीं मिलती। यह हमारे नज़रिए का नतीजा होती है।

        जीत के लिए खेलने, और हार से बचने के लिए खेलने में बहुत बड़ा फ़र्क़ होता है। जब हम जीतने के लिए खेलते हैं, तब पूरे उत्साह और वचनबद्धता के साथ खेलते हैं, लेकिन जब हम न हारने के लिए खेलते हैं, तब हमारे खेल में कमजोरी होती है। जब हम हार से बचने के लिए खेलते हैं, तो दरअसल हम नाक़ामयाबी को टालने के लिए खेलते हैं। हम सभी जीतना चाहते हैं, लेकिन जीत की तैयारी की क़ीमत चुकाने के लिए बहुत कम लोग तैयार होते हैं। विजेता जीतने के लिए वचनबद्ध होते हैं, आरै ख़ुद को उसी मुताबिक ढाल लेते हैं।

3. ज़िम्मेदारी (Responsibility)

         चरित्रवान लोग ज़िम्मेदारियों को क़बूल करते हैं। वे फ़ैसले लेते हैं, और अपनी तक़दीर ख़ुद सँवारते हैं। ज़िम्मेदारी क़बूल करने पर ख़तरा उठाना पड़ता है, जवाबदहे होना पड़ता है। र्कइ बार इससे दिक्क़त महससू होती है। ज़्यादातर लागे बिना कोई ज़िम्मेदारी लिए अपनी आरामगाह में हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहना पसंद करते हैं। वे कुछ कर गुज़रने के बजाए ज़िंदगी इस इंतज़ार में बिताते हैं कि कुछ होगा।

         ज़िम्मेदार लोग अपनी ग़लतियों को क़बूल करते हैं, आरै उनसे सीखते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो अपनी ग़लितयों से कभी सीख नहीं लेते। हम अपनी ग़लितयों के बारे में तीन तरह का नज़रिया अपना सकते हैं — 
  • उन्हें नज़रअंदाज़ कर सकते हैं 
  • उनसे इनकार कर सकते हैं 
  • उन्हें स्वीकार करके फिर कभी न दुहराने की सीख ले सकते हैं

   तीसरे विकल्प को अपनाने के लिए हिम्मत चाहिए। इसको अपनाने में ख़तरे तो हैं, पर यह लाभदायक भी है।

4. कड़ी मेहनत (Hard Work)

         सफलता इत्तिफ़ाक से मिलने वाली चीज़ नहीं है। इसे पाने के लिए काफ़ी तैयारी और चरित्र की ज़रूरत होती है। ज़्यादातर लोग जीतना तो चाहते हैं, लेकिन जीत हासिल करने के लिए मेहनत और वक़्त नहीं लगाना चाहते। सफलता पाने के लिए त्याग और आत्मअनुशासन की ज़रूरत होती है। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। हेनरी फोर्ड (Henry Ford) ने कहा था, “आप जितनी कड़ी मेहनत करेंगे, भाग्य आप पर उतना ही मेहरबान होगा।”

कड़ी मेहनत करने वाले लोगों की उम्र, तज़रबा और शैक्षिक योग्यता, जो भी हो उनकी माँग हर जगह होती है।

  • कड़ी मेहनत करने वाले बिना निगरानी के भी काम करते हैं। 
  • वक्त के पाबंद, और दूसरों की परवाह करने वाले होते हैं। 
  • बात को ध्यान से सुनते हैं, और निर्देशों का ठीक-ठीक पालन करते हैं। 
  • सच बोलते हैं। 
  • आपात स्थिति में बुलाए जाने पर खीशते नहीं हैं। 
  • वो काम सिर्फ काम के लिए नहीं, बल्कि नतीजों के लिए करते हैं। 
  • हँसमुख और शिष्ट होते हैं।

5. चरित्र (Character)

         किसी आदमी का चरित्र उसके नैतिक मूल्यों, विश्वासों और व्यक्तित्व से मिल कर बना होता है। इसकी झलक हमारे व्यवहार और कार्यों में दिखाई देती है। हमें दुनिया के सबसे कीमती रत्न से भी ज़्यादा हिफ़ाजत अपने चरित्र की करनी चाहिए। विजेता बनने के लिए चरित्र आवश्यक है।

कोई ख़ुशनुमा —चरित्रवान व्यक्तित्व (personality) इस तरह का होता है :-

  • उसका अपना एक स्तर होता है। 
  • उसमें आत्मसंयम होता है। 
  • वह संतुलित होता है। 
  • उसमें अहंकाररहित दृढ़ता और आत्मविश्वास होता है। 
  • वह दूसरों का ध्यान रखता है। 
  • वह बहाने नहीं बनाता।  
  • वह अपनी पिछली ग़लतियों से सीखता है।  
  • वह अपने फ़ायदे के लिए दूसरों को तबाह नहीं करता। 
  • उसमें दिखावा नहीं, बल्कि असलियत होती है। 
  • उसके शब्दों में मिठास, नज़र में हमदर्दी, और मुस्कान में सराफ़त होती है।  
  • वह अपने साथ और दूसरों के साथ सहज रहता है। 
  • उसमें एक ख़ास बात होती है, जो उसे जीतने वाली बढ़त दिलाती है। 
  • वह चमत्कार करता है। 
  • वह अद्भुत उपलब्धियाँ हासिल करता है। 
  • वह ज़िम्मेदारियाँ क़बुल करता है। 
  • वह विनम्र होता है। 
  • वह जीत और हार दोनों स्थितियों में समानता बनाए रखता है। 
  • वह भाग्य और प्रसिद्धि का मोहताज़ नहीं होता। 
  • उसमें आत्मअनुशासन और ज्ञान होता है। 
  • वह आत्मसंतुष्ट होता है। 
  • वह जीतने पर दयाभाव, और हारने पर समझदारी दिखाता है।

6. सकारात्मक सोच (Positive Believing)

        सकारात्मक सोच आरै सकारात्मक विश्वास में क्या फ़र्क़ है? हम जब अपने विचारों की आवाज़ सुनते हैं, तो वे हमें कैसे लगते हैं? वे सकारात्मक हैं या नकारात्मक? हम अपने दिमाग़ को सफलता के लिए प्रोग्राम कर रहे हैं या असफलता के लिए? हमारे सोचने के तरीके का हमारे काम करने की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है। अपने लिए सकारात्मक नज़रिया अपनाने, और प्रेरित होने का चुनाव हमें रोज़ करना होता है। सकारात्मक जीवन जीना आसान नहीं है, पर नकारात्मक जीवन जीना भी तो आसान नहीं है। मैं तो अपने लिए सकारात्मक जीवन ही चुनूँगा। सकारात्मक सोच हमें हमारी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल करने में मदद देती है।

7. जितना पाते हैं, उससे अधिक दें (Give More Than You Get)

       आजकल सफलता पाना आसान है। अगर हम ज़िंदगी में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो थोड़ा अधिक दौड़ें। इस थोड़ी-सी बढ़त की वजह से हमारे लिए कोई कम्पीटिशन नहीं रह जाएगा। हमको जितना मिलता है, क्या हम बदले में उससे थोड़ा ज़्यादा देने के लिए तैयार हैं? हम ऐसे कितने लोगों को जानते हैं, जो जितना पाते हैं, उससे थोड़ा ज़्यादा काम करने की इच्छा रखते हैं? बहुत कम।

हम जितने काम के लिए भुगतान पाते हैं, उससे ज़्यादा काम करने के फ़ायदे ये हैं —

  • हम खुद को और ज़्यादा महत्त्वपूर्ण बना लेते हैं, चाहे हम जो भी करते हों और जहाँ भी करते हों। 
  • इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ जाता है। 
  • लोग हमको लीडर मानने लगते हैं। 
  • दूसरे लोग हम पर भरोसा करने लगते हैं। 
  • ऊपर के अधिकारी हमारी इज़्ज़त करने लगते हैं। 
  • हमारे मातहतों, और अफ़सरों, दोनों में हमारे लिए वफ़ादारी बढ़ती है। 
  • आपसी सहयोग बढ़ता है। 
  • गर्व महसूस होता है, और आत्मसंतुष्टि मिलती है।

8. ढृढ़ता की शक्ति (The Power of Peristence)

          महान वायलिनवादक फ्रिट्ज क्रिस्लर (Fritz Kreisler) से किसी ने पूछा, “आप इतनी अच्छी वायलिन कैसे बजाते हैं? क्या यह भाग्य की देन है?” उन्होंने जवाब दिया “यह अभ्यास का नतीजा है। अगर मैं एक महीने तक अभ्यास न करूँ, तो मेरे वायलिन बजाने में आए फ़र्क़ को श्रोता महसूस कर सकते हैं। अगर मैं एक सप्ताह तक अभ्यास न करूँ, तो मेरी पत्नी फ़र्क़ को बता सकती है, आरै अगर मैं एक दिन अभ्यास न करूँ, तो मैं ख़ुद फ़र्क़ बता सकता हूँ।”

          अपने सबसे बेहतर स्तर को प्राप्त करने की यात्रा आसान नहीं है। यह रुकावटों से भरी पड़ी है। जीतने वालों में इन बाधाओं को जीतने, और पहले से भी ज़्यादा संकल्प के साथ वापस लौटने की क्षमता होती है।

हिम्मत न हारो 

जब कोई काम बिगड़ जाए, 
जैसा कि कभी-कभी होगा 
जब रास्ता सिर्फ़ चढ़ाई का ही दिखता हो 
जब पैसे कम और क़र्ज़ ज़्यादा हो 
जब मुस्कराहट की इच्छा आह बने, 
जब चिंताएँ दबा रही हों 
तो सुस्ता लो, लेकिन हिम्मत न हारो 
भूल-भुलैया है ये जीवन पगडंडियाँ जिसकी हमें पार करनी हैं 
कई असफल तब लौट गए 
पार होते गए जो आगे बढ़ते गए 
धीमी रफ़्तार तो क्या 
मंज़िल को इक दिन पाओगे 
सफलता छिपी असफलता में ही 
जैसे शंका के बादल में आशा की चमक 
नाप सकोगे क्या इतनी दूरी 
दूर दिखती है लेकिन मुमकिन है यह नज़दीक हो 
डटे रहो चाहे कितनी भी मुश्किल हो 
चाहे हालात जितने भी बुरे हों, लेकिन हिम्मत न हारो, डटे रहो।

9. अपने काम में गर्व महसूस करें (Pride of Performance)

          तीन लोग ईंटों की चुनाई कर रहे थे। एक आदमी ने उनसे पूछा, “आप क्या कर रहे हैं?” उनमें से एक ने जवाब दिया, “तुम्हें दिखाई नहीं देता कि मैं रोज़ी कमा रहा हूँ?” दूसरे ने जवाब दिया, “तुम्हें दिखाई नहीं देता कि मैं ईंटें चुन रहा हूँ?” तीसरे ने जवाब दिया, “मैं एक सुंदर स्मारक बना रहा हूँ।” वे एक ही काम को कर रहे थे, लेकिन उसके बारे में उनके तीन बिल्कुल अलग-अलग नज़रिए थे। क्या उनके नज़रिए का उनके काम पर भी असर पड़ेगा? जवाब है — ज़रूर पड़ेगा।

         आजकल की दुनिया में लोगों ने अपने काम से गर्व की भावना को अलग कर दिया है क्योंकि इसके लिए कोशिश और कड़ी मेहनत की ज़रूरत होती है। पर कोई काम अंजाम तक तभी पहुँचता है, जब उसके लिए कोशिश की जाती है। हताश होने पर जल्दी क़ामयाबी दिलाने वाले गलत रास्तों (short cut) को अपनाने की इच्छा होती है, लेकिन इनसे बचना चाहिए, भले ही सामने कितनी भी बड़ी लालच हो। गर्व की भावना आदमी के मन में उत्पन्न होती है, और उसकी वजह से उसे जीतने वाली बढ़त मिलती है।

       अपने काम को लेकर गौरव अनुभव करने का मतलब अहंकारी होना नहीं है। यह तो विनम्रता भरे आनंद का इज़हार है। काम और काम को करने वाले की गुणवत्ता को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। आधे मन से किए गए काम से आधे नतीजे नहीं मिलते, बल्कि इस तरह से किए गए काम से कोई नतीजा ही नहीं मिलता।

       किसी काम को अच्छी तरह करने का अहसास ख़ुद में एक इनाम है। ख़राब तरीके से कई काम करने से अच्छा है कि अच्छे ढंग से कुछ ही काम किए जाएँ।

10. शिष्य बनने की इच्छा रखिए — कोई सलाहकार ढूँढ़िए (Be Willing to Be a Student – Get a Mentor)

      ईश्वर, और गुरु, दोनों सामने खड़े हों, तो शिष्य पहले किसे प्रणाम करेगा? भारतीय परंपरा के अनुसार, वह पहले गुरु को प्रणाम करेगा, क्योंकि उसकी सहायता और मार्गदर्शन के बिना शिष्य ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता।

      सलाहकार, या गुरु ऐसा इंसान होता है, जिसके बीते कल का तज़रबा हमारे आने वाले कल को सँवार सकता है। किसी सलाहकार को सावधानी से चुनिए। अच्छा सलाहकार हमको रास्ता और दिशा दिखाएगा, जबकि बुरा सलाहकार हमको भटकाएगा। अपने सलाहकार को सम्मान दीजिए। उत्सुक प्रकृति के शिष्य बनिए। उत्सुक शिष्य को अपने गुरु से सबसे उत्तम उपलब्धि प्राप्त होती है। अच्छे गुरु हमारी प्यास बुझाते नहीं, बल्कि हमारी प्यास को जगाते हैं। वे हमको उस राह पर आगे बढ़ाते हैं जिस पर चल कर सवालों के जवाब हासिल होते हैं।

अगर आप सचमुच सफ़ल होना चाहते हैं, तो उन कामों को करने की आदत डालिए, जिन्हें असफ़ल लोग नहीं करना चाहते।

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👆यह Summary है “जीत आपकी (You Can Win)” By Shiv Khera Book के एक Chapter की। यदि आप Detail में पड़ना चाहते है तो इस Book को यहाँ से खरीद सकते है :-

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